विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोविड-19 विशेष दूत ने कहा, वैक्सीन के निष्‍पक्ष वितरण से 2022 तक विश्वव्यापी प्रतिरक्षण संभव होगा

Dubai, United Arab Emirates-गुरुवार 11 मार्च 2021 [ AETOS Wire ]

 

  • डॉ. टेड्रोस गेब्रेयेसस : वैक्सीन राष्ट्रवाद से वैश्विक महामारीमानवीय और आर्थिक आपदा लंबा खिंचेगी
  • लॉर्ड मार्टिन रीस : लोगों को मंगल ग्रह पर बसाना एक “खतरनाक भ्रान्ति” है


विश्व सरकार शिखर संवाद (वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट डायलॉग्स) में दुनिया के नेताओं ने 9-10 मार्च को वर्चुअल आयोजन के दौरान मानवता की सबसे ज्वलंत चुनौतियों के समाधान की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
 
विश्व सरकार शिखर संवाद में दुनिया के नेताओं ने मानवता की सबसे ज्वलंत चुनौतियों के समाधान की रूपरेखा बनाई (फोटो : एईटीओएस वायर)
 
कोविड-19 पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष दूत, डॉ. डेविड नाबारो ने दावा किया कि धनी देशों के पक्ष में वैक्सीन की सुलभता को अन्यायपूर्ण झुकाव से स्वास्थ्य की देखभाल और आर्थिक संकटों से वैश्विक मुक्ति में विलम्ब होगा, जो 2022 के बाद तक हो सकता है।
 
डॉ. नाबारो ने कहा कि, “जबकि कोवैक्स संबंधी प्रयास प्रशंसनीय है, अगर कुछ ही देश अधिकाँश आपूर्ति को ले लें और बाकी देशों के लिए न्यूनतम नकद तथा वैक्सीन आपूर्ति छोड़ेंगे, तो यह नैतिक नहीं है।”
 
उन्‍होंने आगे कहा कि, “छोटी संख्या में कुछ देशों द्वारा एक-दूसरे से अधिक कीमत देने की कोशिश” के बीच वैक्सीन आपूर्तियों के प्रति वर्तमान “सभी के लिए निःशुल्क” (फ्री फॉर आल) नजरिया कारगर नहीं होगा. लेकिन “हर किसी के लिए वैक्सीन की न्यायोचित सुलभता, से कम-से-कम 2022 तक प्रतिरक्षण का उद्देश्य पूरा होने की उचित संभावना है।”

इसके पहले डब्लूएचओ के महानिदेशक, डॉ. टेड्रोस गेब्रेयेसस ने कहा कि, “वैक्सीन राष्ट्रवाद से वैश्विक महामारी और इससे जुड़ी मानवीय एवं आर्थिक आपदा लम्बी ही खिंचेगी. स्वास्थ्य को काबू में करने वाले खर्च के रूप में नहीं बल्कि उत्पादक एवं तन्यक जनसंख्या में एक निवेश और चिरस्थायी विकास की कुंजी के रूप में देखा जाना चाहिए।”
 
उसके बाद, रॉयल सोसाइटी के प्रेसिडेंट, राईट ऑनरेबल लॉर्ड मार्टिन रीस ने कहा कि दूसरे ग्रहों का अध्ययन और खोज के कारणों पर बहुत सावधानी के साथ विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि : “एलन मस्क का एक मिलियन लोगों को मंगल ग्रह पर बसाने का विचार एक खतरनाक भ्रान्ति है। मंगल ग्रह पर रहना दक्षिण ध्रुव पर या माउंट एवेरेस्ट की चोटी पर रहने से कतई बेहतर नहीं है।
 
“अंतरिक्ष में मानवों के जाने की पीछे एकमात्र कारण एडवेंचर का ही होगा। मंगल पर रहना आसान नहीं होगा. मंगल पर प्रतिकूल वातावरण है।”
 
विख्यात अंतरिक्ष-भौतिकविद , डॉ. नील डिग्रैस टायसन ने उनकी सोच का समर्थन किया, और कहा कि, “एक बिलियन लोगों को पृथ्वी पर विनाश से बचने के लिए दूसरे ग्रह पर ले जाना वास्तविकता से परे प्रतीत होता है।”
 
विश्व सरकार शिखर संवाद में पूरे विश्व के नेताओं को उन प्रवृत्तियों का पूर्वानुमान करने के लिए संयोजित किया गया था जो वैश्विक महामारी के बाद के समाज का भविष्य तय करेंगे।
 
आयोजन के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाइट देखें : https://www.worldgovernmentsummit.org/
  
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