सुमी अलकेब्सी
दुनिया भर के युवा अब आवेदन कर सकते हैं. यह प्रोग्राम उन्हें जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सच्चाई की तह तक जाने वाली बातचीत के ज़रिए संवाद और नेतृत्व करना सिखाता है.
बदलाव और अलग-अलग नैरेटिव्स से भरी दुनिया में सुनना, सवाल करना और सकारात्मक चर्चा में शामिल होना पहले से कहीं ज़्यादा अहम हो गया है. Qatar Foundation के प्रोडक्शन Doha Debates Ambassador Program के ज़रिए दुनिया भर के युवा न सिर्फ़ ये स्किल्स सीख रहे हैं, बल्कि उन्हें अपनी कम्युनिटीज़, करियर और पढ़ाई के क्षेत्रों में सक्रियता से इस्तेमाल भी कर रहे हैं.
यह ऑनलाइन एजुकेशनल प्रोग्राम दुनिया भर के युवाओं को डिबेट करने का एक अलग तरीका सिखाता है. पश्चिमी शैली की वैचारिक लड़ाई में उतरने के बजाय, डिबेट में हिस्सा लेने वाले मजलिस की भावना पर आधारित चर्चा का तरीका अपनाते हैं—मजलिस एक सामाजिक जगह होती है, जो हर किसी के लिए खुली होती है और जहाँ कम्युनिटी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है. हर साल 80 से भी ज़्यादा देशों के 400 से अधिक युवा इस मजलिस में शामिल होते हैं, ताकि वे एक-दूसरे को सुनना, अलग-अलग नज़रियों को समझना और जटिल समस्याओं के समाधान पर मिलकर काम करना सीख सकें.
कतर यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की 19 वर्षीय छात्रा, अलगूरी माकी एक स्पष्ट मकसद के साथ इस प्रोग्राम से जुड़ीं: वे एक ऐसे प्रोग्राम का हिस्सा बनना चाहती थीं, जहाँ विचारों को असर में बदला जा सके. लेकिन इस सफ़र से उन्होंने यह भी समझा कि अपनी मज़बूत मान्यताओं को खुले मन से परखने और समझने की दिशा में कैसे ले जाया जा सकता है.
माकी कहती हैं, “पहले मैं डिबेट को अपनी बात साबित करने और बहस जीतने का तरीका मानती थी.” “लेकिन अब मेरा नज़रिया बदल गया है. आज मैं डिबेट को अलग-अलग तरह के विचारों को एक्सप्लोर करने, अपनी धारणाओं को चुनौती देने और अलग-अलग नज़रियों को समझने का तरीका मानती हूँ. डिबेट का असल मतलब होता है किसी बात को ध्यान से सुनना.”
दोहा में रहने वाले 26 वर्षीय साइबरसिक्योरिटी इंजीनियर, मोहम्मद अल-कसाबी के लिए सार्थक चर्चा का संबंध हमेशा से इस बात से रहा है कि लोग साथ मिलकर कैसे काम करते हैं, लीड करते हैं और असर डालते हैं. कसाबी के पास AI और कॉग्निटिव साइबरसिक्योरिटी में मास्टर ऑफ़ साइंस की डिग्री है.
इसी विश्वास ने उन्हें Ambassador Program तक पहुँचाया, जहाँ डिबेट को लेकर उनकी समझ बदलने लगी. वे याद करते हुए कहते हैं, “मैं डिबेट को दलीलें सामने रखने और दूसरों को अपनी बात का यकीन दिलाने की कोशिश की तरह देखता था.” “समय के साथ मैंने महसूस किया कि चर्चाएँ, बहस जीतने से ज़्यादा समझने के बारे में होती हैं.”
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के पार्टिसिपेंट्स ने इसी तरह के बदलाव महसूस किए हैं. इक्वाडोर के क्विटो की 24 वर्षीय वकील, मारिया एमिलिया ज़ापाता के लिए इस प्रोग्राम ने उन मूल्यों को समझने का फ़्रेमवर्क दिया, जिन पर वे लंबे समय से विश्वास रखती थीं, लेकिन जिन्हें वे साफ़ शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाई थीं.
वे कहती हैं, “समझ बढ़ाने और कॉमन ग्राउंड खोजने के लिए चर्चा का इस्तेमाल करने का विचार मेरे दिल को छू गया.” “इस प्रोग्राम का हिस्सा बनकर मुझे लगा कि मुझे समझा गया है और जैसे मुझे अपनी कम्युनिटी मिल गई है.”
कानून और मानवाधिकार का शैक्षिक बैकग्राउंड होने के कारण, ज़ापाता को प्रतिस्पर्धी माहौल का प्रशिक्षण मिला हुआ है. वे कहती हैं, “अब मैं डिबेट को सुनने, अलग-अलग नज़रियों को अपनाने और आपसी समझ बनाने के ज़रिए की तरह देखती हूँ.”
इस तरह का बदलाव इस प्रोग्राम के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है. Doha Debates की प्रोग्रामिंग दुनिया भर में लाखों लोगों तक पहुँचती है, लेकिन इसका असर सिर्फ़ ऑडियंस की संख्या से नहीं मापा जाता. इसका असर इस बात में भी दिखता है कि पार्टिसिपेंट अपने विचार कितनी साफ़गोई से रखते हैं, मतभेदों के बावजूद दूसरों को सुनते हैं और सकारात्मक चर्चा में शामिल होते हैं. ये स्किल्स—जो बेहतर पब्लिक डिस्कोर्स की बुनियाद होती हैं—प्रोग्राम से कहीं आगे तक काम आती हैं.
नैरोबी, केन्या में रहने वाले 31 वर्षीय रिफ़्यूजी लीडर और इंटरनैशनल रिलेशंस के स्टूडेंट, एलाईजा मनइशिम्वे का विचार है कि ऐसी स्किल्स का होना हमारे लिए बेहद ज़रूरी है.
युगांडा के नाकिवाले रिफ़्यूजी सेटलमेंट में पले-बढ़े मनइशिम्वे ने करीब से देखा कि गलतफ़हमियाँ किस तरह संघर्ष में बदल सकती हैं और दबी हुई आवाज़ों को बुलंद करना कितना ज़रूरी है. वे कहते हैं, “मैंने इस प्रोग्राम को उन दबी हुई आवाज़ों को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के मंच तक ले जाने के अवसर के रूप में देखा और साथ ही सहानुभूति और सुव्यवस्थित तरीके से चर्चा को लीड करने की अपनी क्षमता को मज़बूत करने के मौके के तौर पर भी.”
Doha Debates Ambassador Program, Qatar Foundation की उस व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत शिक्षा को पढ़ाई की परंपरागत सीमा से आगे ले जाया जाता है. ऐसी पहलों के ज़रिए आज के युवा केवल दुनिया से जुड़ ही नहीं रहे हैं, बल्कि सक्रियता से यह भी तय कर रहे हैं कि आने वाले दौर में दुनिया क्या रूप ले सकती है.
18 से 24 वर्ष की उम्र के फ़्लुएंट इंग्लिश स्पीकर्स, 24 अगस्त तक इस प्रोग्राम के लिए आवेदन कर सकते हैं. इच्छुक उम्मीदवार DohaDebates.com/Ambassador पर अधिक जानकारी हासिल कर सकते हैं और आवेदन कर सकते हैं.
Doha Debates
वेबसाइट: DohaDebates.com
X/Twitter: @DohaDebates
Instagram: @DohaDebates
Facebook: Facebook.com/DohaDebates
YouTube: YouTube.com/DohaDebates
Threads: Threads.net/@dohadebates
TikTok: @DohaDebates
Doha Debates का परिचय
Doha Debates बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए, बौद्धिक रूप से जिज्ञासु और सच की खोज करने वाले लोगों को मतभेदों पर रचनात्मक बहस करने का मौका देता है। हम विभाजन के बजाय एकता पर ज़ोर देते हैं और ऐसी चर्चाओं को बढ़ावा देते हैं, जो हमें बाँटने के बजाय साथ लाती हैं। अधिक जानकारी DohaDebates.com पर उपलब्ध है
सुमी अलकेब्सी